BSE Odisha 9th Class Hindi Solutions Poem 1(a) कबीरदास के दोहे

Odisha State Board BSE Odisha 9th Class Hindi Solutions Poem 1(a) कबीरदास के दोहे Textbook Exercise Questions and Answers.

BSE Odisha Class 9 Hindi Solutions Poem 1(a) कबीरदास के दोहे

प्रश्न और अभ्यास (ପ୍ରଶ୍ନ ଔର୍ ଅଭ୍ୟାସ)

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में दीजिए।
ନିମ୍ନଲିଖତ ପ୍ରଶ୍ନୋ କେ ଉତ୍ତର ଦୋ-ତିନ୍ ବାର୍କୋ ମେଁ ଦୀଜିଏ ।
(ନିମ୍ନଲିଖ ପ୍ରଶ୍ନଗୁଡ଼ିକର ଉତ୍ତର ଦୁଇ-ତିନୋଟି ବାକ୍ୟରେ ଦିଅ ।)
(क) मनुष्य के जन्म को दुर्लभ क्यों कहा गया है?
ମନୁଷ୍ୟ କେ ଜନ୍ମ କୋ ଦୁର୍ଲଭ୍ କ୍ୟା କହା ଗୟା ହୈ ?
(ମନୁଷ୍ୟର ଜନ୍ମକୁ କାହିଁକି ଦୁର୍ଲଭ କୁହାଯାଇଛି ?)
उत्तर:
संसार में मनुष्य का जन्म दुर्लभ होता है। मनुष्य को देह या शरीर बार-बार नहीं मिलता।
इसलिए मनुष्य जन्म को दुर्लभ कहा गया है।

(ख) साधुओं और सज्जनों की तुलना किससे की गयी है और क्यों?
ସାଧୁଓଁ ଔର ସଜ୍ଜନୌ କୀ ତୁଲ୍‌ନା କିସ୍‌ କୀ ଗୟୀ ହୈ ଔର କୈ ?
(ସାଧୁ ଓ ସଜନମାନଙ୍କର ତୁଳନା କାହା ସହିତ ହୋଇଛି ଓ କାହିଁକି ?)
उत्तर:
साधुओं और सज्जनों की तुलना सोने से की गयी है। सोना टूटने के बाद भी सौ बार जुड़ सकता है। मतलब यह है कि सज्जन लोग हमेशा मित्रता बनाये रखते हैं।

(ग) कुम्हार का कुंभ किसे कहा गया है और क्यों?
କୁମ୍ଭାର୍ କା କୁମ୍ କିସ୍ କହା ଗୟା ହୈ ଔର ଜ୍ୟୋ?
(କୁମ୍ଭାରର କୁମ୍ଭ କାହାକୁ କୁହାଯାଇଛି ଓ କାହିଁକି ?)
उत्तर:
कुम्हार का कुंभ दुर्जन ( खलव्यक्ति) को कहा गया है। क्योंकि यह कुम्हार के घड़े जैसे होते हैं, जो एक झटके से टूट जाते हैं। दुर्जन जरासा खटपट होते ही अलग हो जाते है।

(घ) कबीरदास के दोहों को ‘साखी’ क्यों कहा जाता है?
(କବିର୍‌ଦାସ କେ ଦୋହେଁ କୋ ‘ସାଖ୍’ କେଁ କହା ଜାତା ହୈ ?)
(କବିର ଦାସଙ୍କ ଦୋହାଗୁଡ଼ିକୁ ‘ସାଖ୍’ କାହିଁକି କୁହାଯାଇଛି)
उत्तर:
‘साखी’ शब्द ज्ञान और अनुभूति का प्रतीक है। यह ज्ञान या अनुभूति है जिसे स्वंय कबीर ने अपने अन्तःकरण से साक्षात्कार किया है। इसलिए कबीरदास की साखियाँ ज्ञान और अनुभूति की साक्षी हैं।

BSE Odisha 9th Class Hindi Solutions Poem 1(a) कबीरदास के दोहे

2. निम्नलिखित अवतरणों का आशय स्पष्ट कीजिए।
(ନିମ୍ନଲିଖୁତ ଅବତରଶାଁ କା ଆଶଯ୍ କ୍ଷଷ୍ଟ କୀଜିଏ?) (ନିମ୍ନଲିଖୂ ପଦ୍ୟ ଖଣ୍ଡର ଆଶୟ ସ୍ପଷ୍ଟ କର ।)
(क) मनिषा जनम दुर्लभ है, देह न बारम्बार।
(ମନିଷା ଜନମ୍ ଦୁର୍ଲଭ୍ ହୈ, ଦେହ ନ ବାରମ୍ବାର୍)।
उत्तर:
यह अवतरण कबीर के दोहे से लिया गया है। इस में कबीर कहते है कि मानव का जन्म दुर्लभ होता है। इसलिए मनुष्य श्रेष्ठ सामाजिक प्राणी है। मनुष्य को देह या शरीर बार – बार नहीं मिलता। यह ईश्वर का वरदान है।

(ख) दुर्जन कुंभ कम्हार के, एकै धका दरार।
(ର୍ଜନ୍ କଂଭ୍ କୁମ୍‌ହାର କେ, ଏକୈ ଧକା ଦରାର)।
उत्तर:
यह अवतरण कवीर के दोहे से लिया गया है। कबीर कहते है कि दुर्जन व्यक्ति कुम्हार के घड़े जैसे होते हैं, जो एक झटके से टूट जाते है। मतलब यह है कि सज्जन लोग सर्वदा मित्रता बनाये रखते हैं मगर दुर्जन जरा-सा खटपट होते ही अलग हो जाते है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए।
(ନିମ୍ନଲିଖିତ ପ୍ରଶୁଁକେ। କେ ଉତ୍ତର ଏକ – ଏକ ବାକ୍ୟ ମେଁ ଦୀଜିଏ)।
(ନିମ୍ନଲିଖ ପ୍ରଶ୍ନଗୁଡ଼ିକର ଉତ୍ତର ଗୋଟିଏ-ଗୋଟିଏ ବାକ୍ୟରେ ଦିଅ ।)
(क) किसके जन्म को दुर्लभ माना गया है?
(କିସ୍ କେ ଜନ୍ମ କୋ ଦୁର୍ଲଭ ମାନା ଗୟା ହୈ?) (କାହା ଜନ୍ମକୁ ଦୁର୍ଲଭ ବୋଲି ସ୍ଵୀକାର କରାଯାଇଛି ?)
उत्तर:
मानव जन्म को दुर्लभ माना गया हैं।

(ख) कौन-कौन टूट जानेके बाद भी जुड़ सकते हैं?
(କୌନ୍-କୌନ୍ ଟୂଟ ଜାନେକେ ବାଦ୍ ଭୀ ଜୁଡ଼ ସକତ୍ରେ ହୈ?)
(କେଉଁମାନେ ଭାଙ୍ଗିଗଲେ ମଧ୍ୟ ଜୋଡ଼ି ହୋଇପାରିବେ ? )
उत्तर:
सोना, सज्जन टूट जानेके बाद भी जुड़ सकते हैं।

BSE Odisha 9th Class Hindi Solutions Poem 1(a) कबीरदास के दोहे

4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक शब्द में दीजिए?
(ନିମ୍ନଲିଖତ ପ୍ରଶ୍ନ। କେ ଉତ୍ତର ଏକ-ଏକ ଶବ୍ଦ ମେଁ ଦୀଜିଏ)।
(ନିମ୍ନଲିଖତ ପ୍ରଶ୍ନଗୁଡ଼ିକର ଉତ୍ତର ଗୋଟିଏ ଲେଖାଏଁ ଶବ୍ଦରେ ଦିଅ ।)
(क) क्या बार-बार नहीं मिलता?
(କ୍ୟା ବାର୍-ବାର୍ ନେହୀ ମିଲତା ?)
(କ’ଣ ବାରମ୍ବାର ମିଳେ ନାହିଁ ? )
उत्तर:
देह / शरीर

(ख) सज्जनों की तुलना किससे की गयी है?
(ସଜନାଁ କୀ ତୁଲ୍‌ନା କିସ୍ ସେ କୀ ଗୟୀ ହୈ ?)
(ସଜନଙ୍କ ତୁଳନା କାହା ସହିତ ହୋଇଛି ?)
उत्तर:
सोने से

(ग) कुम्हार का कुंभ किसे कहा गया है?
(କୁମ୍ଭାର୍ କା କୁମ୍ଭ କିସ୍ କହା ଗୟା ହୈ ?)
(କୁମ୍ଭାରର କୁମ୍ଭ (ମାଠିଆ) କାହାକୁ କୁହାଯାଇଛି ।)
उत्तर:
दुर्जन को

5. कबीरदास के दोहों को कण्ठस्थ कीजिए
(କବିରଦାସଙ୍କ ଦୋହାଗୁଡ଼ିକୁ ମୁଖସ୍ଥ କର ।)
उत्तर:
ଛାତ୍ରଛାତ୍ରୀମାନେ ନିଜେ ମୁଖସ୍ଥ କରିବେ।

भाषा-ज्ञान (ଭାଷା-ଜ୍ଞାନ)

कबीरदास संत थे। काशी में रहते हुए भी उन्होंने देश के विभिन्न स्थानों का भ्रमण किया। अतः उनकी भाषा में विभिन्न प्रदेशों के शब्द पाये जाते हैं। उनकी भाषा में ब्रजभाषा, अवधी, मगही, भोजपुरी, बुन्देलखण्डी, राजस्थानी, पंजाबी आदि का मेल है। साथ ही बोलचाल के क्षेत्रीय प्रभावों के कारण कबीरदास के कुछ शब्द रूपों में परिवर्तन भी देखने को मिलता है। जैसे – मनुष्य से मनिषा, मन से मनवा या मनुवा आदि। उच्चारण के परिवर्तन से वर्त्तनी भी बदल जाती है।

नीचे कुछ शब्द दिये जा रहे हैं जिनका मूल रूप लिखिए जो आप समझते हैं
(ନିମ୍ନରେ ଦିଆଯାଇଥ‌ିବା ଶବ୍ଦଗୁଡ଼ିକର ମୂଳରୂପ ଲେଖ, ଯାହା ତୁମେ ବୁଝିଛ ବା ଭାବୁଛ)
मनिषा – …………….
जुरै – ………………
बहुरि – ……………..
धक्का – ……………
उत्तर:
मनिषा- मनुष्य
जुरै – जुड़
बहुरि – पुनः
धक्का – धक्का

BSE Odisha 9th Class Hindi Solutions Poem 1(a) कबीरदास के दोहे

2. निम्नलिखित शब्दों का समानार्थी शब्द लिखिए।
(ନିମ୍ନଲିଖୂତ ଶବ୍ଦଗୁଡ଼ିକର ପ୍ରତିଶବ୍ଦ ବା ସମାନାର୍ଥକ ଶବ୍ଦ ଲେଖ ।)
मनिषा, देह, तरवर, सोना, कुंभ
उत्तर:
मनिषा – मानव, इन्सान
देह – शरीर, काया
तरवर – पेड़, वृक्ष
सोना – कांचन, सुवर्ण
कुंभ – घड़ा, मटका

3. निम्नलिखित शब्दों का विपरीत शब्द लिखिए।
(ନିମ୍ନଲିଖ୍ ଶବ୍ଦଗୁଡ଼ିକର ବିପରୀତ (ବିଲୋମ) ଶବ୍ଦ ଲେଖ ।)
जनम, दुर्लभ, सज्जन, साधु
उत्तर:
जनम – मरण
दुर्लभ – सुलभ
सज्जन – दुर्जन
साधु – असाधु

4. निम्नलिखित वाक्यों के रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
(ନିମ୍ନଲିଖତ ବାକ୍ୟଗୁଡ଼ିକରେ ଶୂନ୍ୟସ୍ଥାନଗୁଡ଼ିକୁ ପୂରଣ କର ।)
(क) मनिषा जनम …………… है, …………….. न बारम्बार।
उत्तर:
दुर्लभ, देह

(ख) ………………. सज्जन साधुजन ………………… सौ बार।
उत्तर:
सोना, टूटि जुरै

(ग) दुर्जन ………………. एकै धका ………………..।
उत्तर:
कुंभ कुम्हार के, दरार

5. निम्नलिखित शब्दों को पाँच-पाँच बार लिखिए
(ନିମ୍ନଲିଖିତ ଶବ୍ଦଗୁଡ଼କ୍କୁ ପାଞ୍ଚ – ପାଞ୍ଚଥର ଲେଖା)
(ଛାତ୍ରଛାତ୍ରୀମାନେ ଲେଖୁବେ)
कबीर –
अनमोल –
मोती –
दुर्लभ –
कुम्हार –
(ध्यान दीजिए कि हिन्दी में ह्रस्व और दीर्घ मात्राएँ होती हैं। उनको सही लिखना जरूरी है।)
(ଦୃଷ୍ଟିଦିଅ ଯେ ହିନ୍ଦୀରେ ହ୍ରସ୍ଵ ଓ ଦୀର୍ଘ ମାତ୍ରାଗୁଡ଼ିକ ଅଛି। ସେଗୁଡ଼ିକୁ ଠିକ୍ ଲେଖୁବା ଉଚିତ ।)

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

1. दुर्जन कुंभ कुम्हार के एकै धका दरार।
(ଦୁର୍ଜନ ପୁଂଭ୍ କୁମ୍‌ହାର କେ ଏକୈ ଧକା ଦରାର ।)
उत्तर:
कवीरदास जी कहते हैं कि बुरे ब्यक्ति (दुर्जन) कुम्हार के घडे की तरह होते हैं, जो एक झटके से टूट जाते है। दुर्जन जरा-सा मतभेद होते ही अलग हो जाता है।

2. मनिषा जनम दुर्लभ है, देह न बारम्बार।
(ମନିଷା ଜନମ ଦୁର୍ଲଭ୍ ହୈ, ଦେହ ନ ବାରମ୍ବାର ।)
उत्तर:
सन्त कवीर जी कहते हैं कि इस संसार में मानब का जन्म पाना दुर्लभ (मुश्किल ) है। यह मनुष्य रूपी शरीर बार-बार नहीं मिलता। इसलिए इस क्षणभंगुर शरीर के रहते, ईश्वर की साधना के जरिए करनी चाहिए।

अति संक्षिप्त उत्तरमूलक प्रश्नोत्तर

A. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए।

प्रश्न  1.
संत कबीरदास का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर:
संत कबीरदास का जन्म काशी के एक हिंदू-परिवार में सन् १३९८ में हुआ था।

BSE Odisha 9th Class Hindi Solutions Poem 1(a) कबीरदास के दोहे

प्रश्न  2.
कबीरदास क्यों दुःखी हुए?
उत्तर:
समाज में ब्याप्त बुराई को देखकर कबीरदास दुःखी हुए।

प्रश्न  3.
‘साखी’ शब्द कौन-सा शब्द का अपभ्रंश रूप है?
उत्तर:
‘सखी’ शब्द ‘साक्षी’ शब्द का अपभ्रंश रूप है।

प्रश्न  4.
कबीर की भाषा क्या है?
उत्तर:
कबीर की भाषा सधुक्कड़ी है।

प्रश्न  5.
संसार में किसका जन्म दुर्लभ होता है?
उत्तर:
संसार में मनुष्य का जन्म दुर्लभ होता है।

प्रश्न  6.
मनुष्य के जन्म को दुर्लभ क्यों कहा गया है?
उत्तर:
मनुष्य की देह या शरीर बार-बार नहीं मिलता, इसलिए मनुष्य जन्म को दुर्लभ कहा।

प्रश्न  7.
सज्जन और साधुजन कैसे होते हैं?
उत्तर:
सज्जन और साधुजन सोने जैसे होते हैं।

प्रश्न  8.
दुर्जन की ‘तुलना किससे किया गया है?
उत्तर:
दुर्जन की तुलना कुम्हार के घड़े से किया गया है।

प्रश्न  9.
कौन सर्वदा मित्र बनाए रखते हैं?
उत्तर:
सज्जन लोग सर्वदा मित्र बनाए रखते हैं।

प्रश्न  10.
मनुष्य को क्या त्याग करना चाहिए?
उत्तर:
मनुष्य को समस्त सांसरिक विषय-वासनाओं को त्याग करना चाहिए।

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए।

प्रश्न  1.
दुर्जन की तुलना किससे की गयी है?
उत्तर:कुम्हार

प्रश्न  2.
क्या बार-बार नहीं मिलता?
उत्तर:
मनुष्य जन्म

BSE Odisha 9th Class Hindi Solutions Poem 1(a) कबीरदास के दोहे

प्रश्न  3.
सज्जनों की तुलना किससे की गयी है?
उत्तर:
सोना

प्रश्न  4.
कौन – कौन टूट जाने के बाद भी जूड़ सकता है?
उत्तर:
सज्नन और साधुजन

प्रश्न  5.
किसके जन्म को दुर्लभ माना गया है?
उत्तर:
मनुष्य

प्रश्न  6.
सोने से किसकी तुलना की गयी है?
उत्तर:
सज्जनों

प्रश्न  7.
साखी शब्द किस का प्रतीक है?
उत्तर:
ज्ञान और अनुभूति

C. रिक्तस्थानों को भरिए।

प्रश्न  1.
………………. सर्वदा मित्र बनाए रखते है।
उत्तर:
सज्जन लोग

प्रश्न  2.
कवीर की भाषा ……………….. है।
उत्तर:
सधुकड़ी

प्रश्न  3.
कवीरदास का जन्म ………………… हुआ था?
उत्तर:
1398

प्रश्न  4.
“मनिषा जनम दुर्लभ है, देह न बारबार” – यह पंक्ति ……………… कवि की है।
उत्तर:
कबीर

प्रश्न  5.
‘सोना सज्जन साधु जन टूटी जुरै सौ बार’ – यह पंक्ति कवि की है।
उत्तर:
कबीर

BSE Odisha 9th Class Hindi Solutions Poem 1(a) कबीरदास के दोहे

प्रश्न  6.
“दुर्जन कुंभ कुम्हार के, एकै धका दरार”‘ इस पंक्ति में ‘कुंभ’ शब्द के लिए प्रयुक्त है।
उत्तर:
मटका

प्रश्न  7.
मनुष्य जन्म में बार बार नहीं मिलता।
उत्तर:
शरीर

प्रश्न  8.
कबीर के अनुसार ज्ञान और अनुभूति का प्रतीक है।
उत्तर:
साखी

प्रश्न  9.
सज्जनों की तुलना से की गयी है।
उत्तर:
सोने से

प्रश्न  10.
टूट जाने के बाद जुड़ा सकता है ?
उत्तर:
सज्जन

D. सही उत्तर चुनिए।

1. कुम्हार का कुंभ किसे कहा गया है?
(A) दुर्जन को
(B) सज्जन को
(C) कुम्हार
(D) घड़े को
उत्तर:
(A) दुर्जन को

2. कौन जुलाहे का काम करते थे?
(A) सूरदास
(B) तुलसी दास
(C) कबीर दास
(D) रहीम
उत्तर:
(C) कबीर दास

3. कबीर दास का जन्म कब हुआ था?
(A) 1898
(B) 1398
(C) 1498
(D) 1598
उत्तर:
(B) 1398

4. मनुष्य को क्या बार-बार नहीं मिलता?
(A) देह
(B) मन
(C) धन
(D) जन्
उत्तर:

5. ‘मनिषा जनम दुर्लभ है’ – इस पंक्ति का कवि कोन हैं।
(A) तुलसी दास
(B) सूर दास
(C) कबीर दास
(D) रहीम
उत्तर:
(A) तुलसी दास

BSE Odisha 9th Class Hindi Solutions Poem 1(a) कबीरदास के दोहे

6. सज्जनों की तुलना किससे की गई है?
(A) साधु से
(B) जन से
(C) सोने से
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) सोने से

7. क्या बार-बार नहीं मिलता?
(A) मनुष्य जन्म
(B) पशु जन्म
(C) खाना
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) मनुष्य जन्म

8. पेड़ से क्या झड़ जाते है?
(A) पत्ते
(B) डाली
(C) टहनी
(D) फल
उत्तर:
(D) फल

9. दुर्जन की तुलना किससे की गई है?
(A) कुम्हार से
(B) सोना से
(C) कुंभ से
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) कुंभ से

10. क्या टूटने के बाद भी जूड़ सकते है?
(A) सोना और साधु
(B) सोना और दुर्जन
(C) चाँदी और सोना
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) सोना और साधु

दोहे (ତେ।ହେ)

मनिषा जनम दुर्लभ है, देह न बारम्बार।
तरवर थै फल झड़ि पड्या, बहुरि न लागै डार॥
ମନିଷ ଜନମ୍ ଦୁଲଭହି, ଦେହ ନବାରମ୍ବାର୍ ।
ତରୱର ଥୈ ଫଲ୍ ଝଡ଼ି ପଡ଼, ବହୁରି ନ ଲାଗି ଡାର୍ ॥)

हिन्दी व्याख्या:
संसार में मनुष्य का जन्म दुर्लभ होता है। मनुष्य को देह या शरीर बार-बार नहीं मिलता। वृक्ष से फल के एक बार झड़ जानेके बाद यह पुनः उस पेड़ की डाली पर लग नहीं सकता। मतलब यह है कि मानव को समस्त सांसारिक विषय-वासनाओं को त्याग करना चाहिए। इस क्षणभंगुर शरीर के रहते साधना के जरिये ईश्वर की उपासना करनी चाहिए। तभी दुर्लभ मानव-जीवन का सदुपयोग हो सकेगा।
ଓଡ଼ିଆ ଅନୁବାଦ:
ସଂସାରରେ ମନୁଷ୍ୟ ଜନ୍ମ ଦୁର୍ଲଭ (ବିରଳ) ଅଟେ। ମନୁଷ୍ୟର ଦେହ ବା ଶରୀର ବାରମ୍ବାର ମିଳେ ନାହିଁ । ଗଛରୁ ଫଳ ବା ପତ୍ର ଥରେ ଝଡ଼ିପଡ଼ିଲେ ତାହା ଗଛର ଡାଳରେ ପୁନଶ୍ଚ ଯୋଡ଼ିହୁଏ ନାହିଁ । ଏହାର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ ହେଉଛି ମନୁଷ୍ୟ ତାହାର ସମସ୍ତ ସାଂସାରିକ ବିଷୟ ବାସନା ପ୍ରତି ଲୋଭ ପରିତ୍ୟାଗ କରିବା ଉଚିତ।

सोना सज्जन साधु जन टूटि जुरै सौ बार।
दुर्जन कुम्भ कुम्हार के, एकै धका दरार॥
(ସୋନା ସଜନ୍ ସାଧୁ ଜନ୍ ଟୂଟି ଜୁରି ସୌ ବାର୍।
ଦୁର୍ଜନ୍ କୁମ୍ କୁମ୍‌ହାର୍ କେ, ଏକୈ ଧକା ଦରାର୍ ॥)

हिन्दी व्याख्या:
सज्जन और साधुजन सोने जैसे होते हैं जो टूटने के बाद भी सौ बार जुड़ सकते हैं; जबकि दुर्जन या बुरे व्यक्ति कुम्हार के घड़े जैसे होते हैं जो एक धक्के या झटके से टूट जाते हैं। मतलब सज्जन लोग सर्वदा मित्रता बनाये रखते हैं, मगर दुर्जन जरा-सा खटपट होते ही अलग हो जाता है।
ଓଡ଼ିଆ ଅନୁବାଦ:
ସୁବର୍ଣ୍ଣ (ସୁନା) ଯେପରି ଶହେ ଥର ଭାଙ୍ଗିଲେ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଯାଏ, ସେହିପରି ଜ୍ଞାନୀ ଓ ସାଧୁଜନମାନଙ୍କର ମିତ୍ରତା ଭାଙ୍ଗେ ନାହିଁ । ଦୁର୍ଜନ ବା ଖଳବ୍ୟକ୍ତି କୁମ୍ଭାରର କୁମ୍ଭ ସଦୃଶ ହୋଇଥାଏ, ଯାହା ଗୋଟିଏ ପାହାର ବା ବିପଦରେ ଭାଙ୍ଗିପଡ଼େ । ଏହାର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ ହେଉଛି ସାଧୁଜନଙ୍କ ସହିତ ମିତ୍ରତା ସର୍ବଦା ରହିଥାଏ କିନ୍ତୁ ଦୁର୍ଜନ ବା ଖଳଲୋକଙ୍କ ସହିତ ମିତ୍ରତା ରହିପାରେ ନାହିଁ।

शबनार: (ଶରାର୍ଥି)

मनिषा – मनुष्य (ମାନବ)।

देह – शरीर (ଶବର)।

डार – डाली (ଡାଳ)।

दरार – फटना/मिटना (ଫଟିବ )।

दुर्लभ – मिलना मुश्किल है (ମିଳିବା କଷ୍ଟ)।

तरवर – पेड़ (ବକ୍ଷ)।

जुरै – जुड़ जाते हैं (ଯୋଡ଼ ହେ।ଇଯାଏ )।

धका – झोंका (ଠେଲା)।

कवि परिचय (କବି ପରିଚୟ)।

सन्त कबीरदास का जन्म सन् 1398 में काशी के एक हिन्दू परिवार में हुआ। पर उनका पालन-पोषण नीरू और नीमा नामक मुसलमान जुलाहा दम्पति ने किया। इसलिए कबीरदास को हिन्दू और मुसलमान – दोनों के गुण मिले। कबीर को किसी विद्यालय में पढ़ने का सुयोग नहीं मिला। लेकिन वे बड़े तेज बुद्धिवाले बालक थे। वे जुलाहे का काम करते थे। दुनिया को देखकर उन्होंने बहुत कुछ सीख लिया। समाज में व्याप्त बुराई को देख उन्हें बहुत दुःख हुआ। लोगों को अच्छी बातें सीखाने के लिए वे कमर कसकर खड़े हो गये। उन्होंने लोगों को काम करने, दूसरों के साथ अच्छा बर्ताव करने, बुद्धि और विचार से काम लेने का आग्रह किया। कबीर ने तप, तीर्थ, व्रत, संध्या, नमाज आदि के बदले नैतिकता, सदाचार, ज्ञान और भगवत् प्रेम पर जोर दिया। कबीर की भाषा सधुक्कड़ी है।

Leave a Comment